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बर्फ की खोज अंग्रेजो ने नही की

↪ हमारे देश में एक महान राजा हुआ उसका नाम था हर्षवर्धन | अापने इनके बारे में पढ़ा भी होगा और सुना भी होगा | उसके बारे में एक दो बाते आपको बताना चाहुगा | ↪ वो वैज्ञानिक था और राजा भी सबसे बड़ी बात उनके बारे में जो दुनिया नहीं जानती वो ये कि वो खाली राजा नहीं था, वो वैज्ञानिक था और राजा भी और वो चक्रवर्ती सम्राट था |
↪ चक्रवर्ती सम्राट का मतलब आप समझते हो ???
– जो एक गाँव का राजा होता है उसको हमारे देश में कहा जाता है सरपंच,
– जो दस गाँव का राजा होता है उसको कहा जाता है नायक
– जो सौ गाँव का राजा होता है उसको कहते है सामंत
– जो हजार गाँव का राजा होता है उसको कहते है राजा
– जो दस हजार गाँव का राजा होता है उसको कहते है महाराजा
– जो एक लाख गाँव का राजा हो जाये वो सम्राट
– जो सात लाख गाँव का राजा हो वो चक्रवर्ती सम्राट
↪ और भारत में लगभग 7 लाख ही गाँव रहे तो इसका मतलब ये कि हर्षवर्धन भारत का सम्राट था और वैज्ञानिक भी था |
↪ और विज्ञानं में वो रसायण शास्त्र के बहुत बड़े ज्ञाता थे. जब वो राजा बने तो उनकी बेटी बीमार हो गई और उसको बहुत तेज बुखार आ गया तो हर्षवर्धन ने पहली बार अपनी बेटी का बुखार उतार…

प्लास्टिक सर्जरी की खोज इंगलैड ने नही की

↪ प्लास्टिक सर्जरी (Plastic Surgery) जो आज की सर्जरी की दुनिया मे आधुनिकतम विद्या है इसका अविष्कार भारत मे हुअा है| सर्जरी का अविष्कार तो हुआ हि है प्लास्टिक सर्जरी का अविष्कार भी यहाँ हि हुआ है| प्लास्टिक सर्जरी मे कहीं की त्वचा को काट के कहीं लगा देना और उसको इस तरह से लगा देना की पता हि न चले यह विद्या सबसे पहले दुनिया को भारत ने दी है| 

↪ 1780 मे दक्षिण भारत के कर्णाटक राज्य के एक बड़े भू भाग का राजा था हैदर अली| 1780-84 के बीच मे अंग्रेजों ने हैदर अली के ऊपर कई बार हमले किये और एक हमले का जिक्र एक अंग्रेज की डायरी मे से मिला है| एक अंग्रेज का नाम था कर्नल कूट उसने हयदर अली पर हमला किया पर युद्ध मे अंग्रेज परास्त हो गए और हैदर अली ने कर्नल कूट की नाक काट दी|

↪ कर्नेल कूट अपनी डायरी मे लिखता है के “मैं पराजित हो गया, सैनिको ने मुझे बन्दी बना लिया, फिर मुझे हैदर अली के पास ले गए और उन्होंने मेरा नाक काट दिया|” फिर कर्नल कूट लिखता है के “मुझे घोडा दे दिया भागने के लिए नाक काट के हात मे दे दिया और कहा के भाग जाओ तो मैं घोड़े पे बैठ के भागा| भागते भागते मैं बेलगाँव मे आ गया, बेलगाँव मे एक…

अंग्रेजी के शब्दो का पर्दाफ़ाश

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Good Morning :हमारे भारत देश में कभी ''Good Morning'' नही कहा जा शकता लेकिन ये शब्द यूरोप के देश मे बोला जाता है , वो भी ६ या ७ महीने में एक बार | क्योकी यूरोप के देशो मे रोज सुरज नही निकलता |वो ६ या ७ महीने मे सिर्फ एक ही बार निकल ता है |ओर जब सुरज निकलता है तो सब लोग एक दुसरे को बधाई देते है और कहते है ''Good Morning'' | लेकिन भारत में तो हररोज सुरज निकलता है | भारत मे तो ''Every Morning Is Good Morning'' | हमे गर्व होना चाहिए की हम एेसे देश में पैदा हुए जहा हररोज सुरज निकलता है |


Good Night : हमारे भारत देश में कभी ''Good Night'' भी नही होता है लेकिन यूरोप के देशो मे कहा जाता है |युरोप के देशो मे कोई भी रात अच्छी नहीं होती | और किसीको नहीं पता होता है कि कब कीसी रातको बारीस आ जाये , कब किसी रात को तुफान आजाये | ये कीसी को पता नहीं रहेता इसी लिए सब लोग एक दुसरे को कहते हैं की ''Good Night'' लेकिन भारत में तो ''Every Night Is Good Night '' |भारत में तो हर रात अच्छी होती है लेकिन यूरोप के दे…

अंग्रेजी भाषा का पर्दाफ़ाश

अंग्रेजी भाषा के मीठे सवालो का कडवा जवाब

 • आज के मैकाले मानसों द्वारा अंग्रेजी के पक्ष में तर्क और उसकी सच्चाई :

 1 . क्या अंग्रेज़ी अंतर्राष्ट्रीय भाषा है ?
उत्तर :- विश्व में इस समय 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थायें ( Top 10 Economies ) अमेरिका , चीन , जापान , भारत , जर्मनी , रशिया , ब्राजील , ब्रिटेन , फ्रांस एवं इटली है । जिसमें मात्र २ देश ही अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं अमेरिका और ब्रिटेन वोह भी एक सी नहीं , दोनों कि अंग्रेजी में भी अंतर है | अब आप ही बताएं कि किस आधार पर अंग्रेजी को वैश्विक भाषा ( Global Language ) माना जाए | दनिया में इस समय 201 देश हैं और मात्र 12 देशों में अंग्रेजी । बोली , पढ़ी और समझी जाती है । संयुक्त राष्ट्र संघ जो अमेरिका में है वहां की भाषा अंग्रेजी नहीं है , वहां का सारा काम फ्रेंच में होता है । इन अंग्रेजों की जो बाइबिल है वो भी अंग्रेजी में नहीं थी । और ईशा मसीह अंग्रेजी नहीं बोलते थे । ईशा मसीह की भाषा और बाइबिल की भाषा अरमेक थी । अरमेक भाषा की लिपि जौ थी वो हमारे यगला भाषा से मिलती जुलती थीं , समय के कालचक्र में वो भाषा विलुप्त हो बायी । पूरी दुन…

पुस्तकें PDF

निवेदन :- • यदी आप को लगे की यह पुस्तक हटा देने योग्य हैं तो तुरंत हमे टिप्पणी करके बताए |  • यदी कोई पुस्तक मे वेद विरुद्ध बात लिखी हुई है तो हमे तुरंत टिप्पणी करके बताए | वेद • ऋग्वेद भाष्य- महर्षि दयानंद सरस्वती
• यजुर्वेद भाष्य - महर्षी दयानंद सरस्वती
उपवेद • धनुर्वेद

अष्टाध्यायी - महर्षि पाणिनी  • अष्टाध्यायी भाग १ • अष्टाध्यायी भाग २ • अष्टाध्यायी भाग ३ • अष्टाध्यायी भाग ४ • अष्टाध्यायी भाग ५ • अष्टाध्यायी भाग ६
दर्शन • योगदर्शन - महर्षि पतंजलि 
सांख्यदर्शन - महर्षि कपिल
न्यायदर्शन - महर्षि गौतम
वैशेषिकदर्शन - महर्षि कणाद
• पुर्व मींमासा - महर्षि जैमिनी
• उत्तर मीमांसा महर्षि बादरायण
• पातंजल योगदर्शन - महर्षि व्यास एवं राजाभोज भाष्य
आयुर्वेद • अष्टांगह्रदयम् - महर्षि वाग्भट्ट
• चरकसंहिता - महर्षि चरक
• शुश्रुत संहिता - महर्षि शुश्रुत
महर्षी भारद्वाज • बृहद विमानशास्त्र - महर्षी भारद्वाज
राजर्षि मनु महाराज • मनुस्मृती (विशुद्ध मनुस्मृती)
भास्कराचार्य • लीलावती - भास्कराचार्य
सिद्धांत शिरोमणि - भास्कराचार्य
आचार्य चाणक्य • चाणक्य नीति दर्पण - आचार्य चाणक्य  • चाणक्यसूत्राणि - आच…

जानिये इतिहास का सच - लाल-किला शाहजहाँ ने नही बनवाया

• लाल - किला •
 आईये , हम लाल - किले से अपना समालोचनात्मक अध्ययन प्रारम्भ करें ‘ पृथ्वीराज रासो ' नामक समकालीन ग्रन्थ से हमें ज्ञात होता है कि पृथ्वीराज यमुना नदी के तट पर बने एक राजमहल में रहता था । परम्परागत लेखे भी हमें बताते हैं कि पृथ्वीराज का महल लाल - कोट अर्थात् लाल - दीवारों की संरचना के नाम से विख्यात था । इन दोनों विवरणों का पूर्णोत्तर हमें आज दिल्ली के एकमात्र उस भवन से मिलता है जो आज लाल - किला कहलाता है । लेकिन मुगल बादशाह शाहजहाँ को दिल्ली का लाल - किला बनाने का सम्पूर्ण यश आज भी व्यर्थ में दिया जा रहा है ।

शाहजहाँ से लगभग 250 वर्ष पूर्व सन् 1398 में दिल्ली - निवासियों का नर - संहार करने वाले तैमूरलंग ने पुरानी दिल्ली का उल्लेख किया है । लेकिन हमारे इतिहास - ग्रन्थों में पुरानी दिल्ली का वर्णन उस नगरी के रूप में आता है । जिसकी स्थापना शाहजहाँ ने की थी । दिल्ली में लाल - किला पुरानी दिल्ली का य - स्थल है । तथ्य रूप में , पुरानी दिल्ली धुरीय - मार्ग - चाँदनी चौक मार्ग जो ' केले को उस भवन से जोड़ता है जो आज फतहपुरी मस्जिद कहलाता है । जो दिल्ली के हिन्दू - शासकों के…

हनुमानजी बन्दर नहीं थे |

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• हनुमान जी बंदर नही थे •



           • हनुमानजी बंदर नहीं थे 
वानर - वने भव वानम् , राति ( आदाने ) गृह्णाति ददाति वा । वानं वन सम्बन्धिनं फलादिकं गृहणाति ददाति वा – जो वन में उत्पन्न होने वाले फलादि खाता है वह वानर कहलाता है । वर्तमान में जंगलों व पहाड़ों में रहने और वहां पैदा होने वाले पदार्थों पर निर्वाह करने वाले ' गिरिजन ' कहाते हैं । इसी प्रकार वनवासी और वानप्रस्थ वानर वर्ग में गिने जा सकते हैं । वानर शब्द से किसी योनि विशेष , जाति , प्रजाति अथवा उपजाति का बोध नहीं होता ।

जिसके द्वारा जाति एवं जाति के चिह्नों को प्रकट किया जाता है , वह आकृति है । प्राणि देह के अवयवो की नियत रचना जाति का चिह्न होती है । सुग्रीव , वालि आदि के जो चित्र देखने में आते हैं उनमें उनके पूछ लगो दिखाई जाती है , परन्तु उनकी स्त्रियों के पूछ नहीं होती । नर - मादा में इस प्रकार का भेद अन्य किसी वर्ग में देखने में नहीं आता । इसलिए पूंछ के कारण हनुमान आदि को बन्दर नहीं माना जा सकता ।

 हनुमान से रामचन्द्र जी की पहली बार भेट ऋष्यमूक पर्वत पर हुई थी । दोनों में परस्पर बातचीत के बाद रामचन्द्र ज…

विज्ञान का जाने सच - गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्युटन ने नही दिया

↪ दोस्तो आज दुनिया में सबसे बड़ा झूठ प्रचारीत किया जा रहा है कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्युटन ने खोजा |और न्युटन ने अपनी गलतियों को छुपाने के लिए एक कहानी बनाकर दुनिया के सामने रख दिया की वो एक सेब के पेड के नीचे बैठा था और उपर से सेब गिरा और गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत दे दिया | लेकिन ये कहानी सच्ची नही है | सिर्फ लोगो को मुर्ख बनाने एवं अपनी मूर्खता छुपाने के लिए ये कहानी बनाई गई | न्यूटन ने दुनिया को मुर्ख बनाया है |लेकिन उसका पर्दाफ़ाश  हो चुका है |

↪ अब आते हैं मूल विषय पर |गुरुत्वाकर्षण की खोज के लिए अंग्रेजों ने न्यूटन का नाम प्रसिद्ध किया है। लेकिन न्युटन ने गुरुत्वाकर्षण कि खोज नहीं की |अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा हो ओगा की यदी न्युटन ने गुरुत्वाकर्षण की खोज नहीं की तो आखीर किसने की |

↪ दोस्तों जब न्युटन का बाप भी पैदा नही हुआ था तब भास्कराचार्य ने 'सिद्धान्त शिरोमणी' में यह बात लिखी है। उन्होंने लिखा कि 'एक भारी वस्तु (इसके वजन से) पृथ्वी पर गिरता है | लेकिन ये पृथ्वी का आकर्षण है की इसे नीचे खींच कर लाता है। 'इसका अर्थ है कि पृथ्वी, ग्रह, नक्षत्र , चंद्र…

पायथागोरस का पर्दाफ़ाश

पायथागोरस का प्रमेय पायथागोरस का नहीं है, बल्कि बोधायन और आपस्तंब का है। 
त्रिकोणमिति (ज्योमेट्री) का सिद्धांत यह है कि कर्ण का वर्ग बराबर लंब वर्ग गुणा आधार का वर्ग होता है, यह सिद्धांत युनान के पायथागोरस के नाम से दर्ज है। लेकिन वास्तव में बोधायन और आपस्तंब ने शुल्वसूत्रो मे (800 ईसा पूर्व ) ने विभिन्न वैदिक यज्ञो के लिए आवश्यक वेदियों का प्रमाण निश्चित कीया । यह सूत्र इसमें अंकित है। इस सिद्धांत का विश्लेषण चौथी शताब्दी के 'सूर्यसिद्धांत' (नए) ग्रंथ में भी किया गया है। लेकिन इस तरह का ज्ञान यूरोपीय लोगों को पहली शताब्दी में कलौ-वियास द्वारा हुआ। ब्रह्मगुप्त और भास्कराचार्य चतुर्भुज क्षेत्र का क्षेत्रफल उसके बाजुओ की लंबाई जानकर बता देते थे।
स्वामी विद्यानंद सरस्वती कृत भूमिका भास्कर मे थिबो के  की बात का उल्लेख किया है :-

The Sulva Sutras date from the fifteenth century before christ the geometrical theorem that the square of hypotenuse is equal to the squares of the other two sides of a triangle is ascribed by the greek to Pythogoras. But it was known to India centuries b…

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु का रहस्य सबुत के साथ

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हम सब सुभाष जयंती आज मना रहे हैं सुभाष चंद्र बोस की जयंती आज है 23 जनवरी और हर साल मनाई जाती है लेकिन आज भी यह बड़ा प्रश्न है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु आखिर हुई कैसे ?

अभी कुछ लेटेस्ट खोज हुई है उन पर रिसर्च सामने आए हैं और गलती से कुछ भारत सरकार के आंकड़े निकल आए |

  कोई सरकार नहीं चाहती ना पहले कांग्रेस ने चाहा था और ना ही आज बीजेपी चाह रही है |

 लेकिन गलती से ऐसे आंकड़े निकल आए जो यदी 1950 या 55 मे निकल आते तो इस देश में वो बबाल खडा होता जिसकी कल्पना नही कर सकते हैं |

कुछ उदाहरण देता हूं आपको सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु कैसे हुई थी यह बहुत बड़ा प्रश्न है और यह जानना जरूरी है इस देश के लिए | यदी हमारे परिवार का कोई व्यक्ति चला जाए या सामान्य व्यक्ति भी चला जाये तो अभी उसकी जांच कमेटी बैठ जाती है | बुमरी देवी केस में शव को निकाल कर जांच हुई थी इस देश में कैंडल मार्च निकाले गये थे |

लेकिन नेताजी सुभाषचंद्र बोस जिसके कारण हम आज स्वतंत्र है | यह मैं नहीं कह रहा अेटली कह रहा है ब्रिटिश प्रधानमंत्री ट्रांसफर ऑफ़ पॉवर जिस में साइन किया था वह कह रहा है कि गांधी या किसी अन्य के कारण …